HomeLibraryPhaladeepikaCh.2Verse 8
Phaladeepika
Chapter 2 · graha bheda · ग्रह भेद · Verse 8
Sanskrit · DevanāgarīPhaladeepika manuscript tradition
पित्तास्थिसारोऽल्पकचश्च रक्तश्यामाकृतिः स्यान्मधुपिङ्गलाक्षः ।
कौसुभ्भवासाश्चतुरस्रदेहः शूरः प्रचण्डः पृथुबाहुरर्कः
IAST Transliteration
pittāsthisāro'lpakacaśca raktaśyāmākṛtiḥ syānmadhupiṅgalākṣaḥ | kausubhbhavāsāścaturasradehaḥ śūraḥ pracaṇḍaḥ pṛthubāhurarkaḥ
TranslationsTwo-source verified
English

The Sun is of a bilious temperament and is strong in bones in the body. He has a limited quantity of hair, and possesses a dark-red form. He has eyes of a reddish brown colour. He is clad in red and has a square-built body. He is valiant and wrathful, and has massive arms.

Hindi

अब प्रत्येक ग्रह का स्वरूप और उसकी प्रकृति बताते हैं। इसका प्रयोजन क्या है? यदि लग्न में कोई ग्रह हो तो उसी ग्रह के गुण और प्रकृति के अनुसार जातक की प्रकृति होती है। जिसके लग्न में मंगल है उसकी प्रकृति में उग्रता, साहस, रणप्रियता आदि गुण आवेंगे। किस राशि में स्थित होकर लग्न में मंगल है इसका भी बहुत प्रभाव पड़ेगा। यदि बलवान् मंगल है तो शूरवीर सेनापति होकर लड़ सकता है, यदि दुर्बल पाप-पीड़ित मंगल है तो कुंजड़ों की-सी लड़ाई मोल ले सकता है। जब लग्न में कोई ग्रह नहीं होता है तो लग्नेश की तरह मनुष्य की आकृति, प्रकृति, गुण, स्वभाव आदि होते हैं। इस कारण प्रत्येक ग्रह की प्रकृति बतलाई जाती है। सूर्य — पित्त-प्रकृति का, अस्थिसार (हड्डियों में बल), कम बाल, ताम्र-वर्ण (गहरा लाल), मधु-पिंगल नेत्र (शहद की तरह भूरे), कषाय वस्त्र धारण करने वाला, चतुरस्र (चौकोर) देह, शूरवीर, प्रचण्ड (कुपित स्वभाव), मोटी भुजाओं वाला है।

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