The man born in an Avayoga will be insignificant. He will suffer from extreme poverty and will be short-lived. He will be humiliated, he will associate with the wicked, will be of bad behaviour and will be deformed. His position itself will be shaky.
यदि लग्न या लग्नेश अशुभ ग्रह से युत या वीक्षित हो और लग्नेश दुःस्थान में हो तो 'अवयोग' होता है। जो अवयोग में पैदा होता है उसकी स्थिति बहुत चञ्चल होती है। ऐसा व्यक्ति असज्जनों के साथ रहता है; न उसका शरीर अच्छा रहता है (शरीर में कोई न कोई रोग लगा रहे); न उसका चरित्र ही अच्छा होता है। जातक स्वल्पायु और अप्रसिद्ध रहता है; और घोर दरिद्रता तथा अपमान को प्राप्त होता है। मन्त्रेश्वर महाराज ने बहुत सुन्दर लिखा है — लग्न और लग्नेश के बलवान होने से सारी कुण्डली सुधर जाती है और लग्न तथा लग्नेश के दुर्बल होने से सारी कुण्डली बिगड़ जाती है — ऐसा हमारा विचार है।
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