HomeLibraryPhaladeepikaCh.6Verse 5
Phaladeepika
Chapter 6 · yogādhyāya · योगाध्याय · Verse 5
Sanskrit · DevanāgarīPhaladeepika manuscript tradition
विधोस्तु सुनफानफाधुरुधुराः स्वरिःफोभय\-
स्थितैर्वंरविभिर्ग्रहैरितरथा तु केमद्रुमः ।
हिमत्विषि चतुष्टये ग्रहयुतेऽथ केमद्रुमो
न हीति कथितोऽथवा हिमकराद्ग्रहैः केन्द्रगैः
IAST Transliteration
vidhostu sunaphānaphādhurudhurāḥ svariḥphobhaya\- sthitairvaṃravibhirgrahairitarathā tu kemadrumaḥ | himatviṣi catuṣṭaye grahayute'tha kemadrumo na hīti kathito'thavā himakarādgrahaiḥ kendragaiḥ
TranslationsTwo-source verified
English

When planets other than the Sun occupy the 2nd, the 12th or both houses reckoned from the Moon, the resulting 3 Yogas are respectively styled Sunapha, Anapha and Durudhara. In the absence of the 3 Yogas defined above, there is the Kemadruma Yoga. There are some who declare that there is no Kemadruma where a Kendra or the Moon is associated with a planet, or where planets occupy a Kendra house reckoned from the Moon.

Hindi

अब चार योग बताते हैं। इन चारों योगों का विचार चन्द्र राशि से किया जाता है। इन चारों योगों में जहाँ ग्रह का उल्लेख किया जावे वहाँ मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि — केवल इन पाँच ग्रहों को समझना चाहिये। सूर्य की गणना इनमें नहीं करनी चाहिये। यदि चन्द्रमा से द्वादश में कोई ग्रह हो और द्वितीय में कोई ग्रह नहीं हो तो अनफा योग होता है। यदि चन्द्रमा से द्वादश में कोई ग्रह न हो और केवल द्वितीय में हो तो सुनफा योग होता है। यदि चन्द्रमा से द्वितीय और द्वादश दोनों स्थानों में ग्रह हों तो दुरुधरा योग होता है। यदि चन्द्रमा से द्वितीय और द्वादश में — दोनों स्थानों में से किसी में भी कोई ग्रह न हो तो केमद्रुम योग होता है। कुछ लोगों का मत है कि निम्नलिखित योगों में से कोई हो तो केमद्रुम योग नहीं होता — (१) यदि चन्द्रमा के साथ कोई ग्रह हो। (२) यदि लग्न से केन्द्र में कोई ग्रह हो। (३) यदि चन्द्रमा से केन्द्र में कोई ग्रह हो। मन्त्रेश्वर महाराज ने यह लिखकर कि कुछ अन्य लोगों का मत ऐसा है, यही पुष्ट किया कि उनके विचार से तो चन्द्रमा से द्वितीय और द्वादश में कोई ग्रह न हो तो केमद्रुम योग होता है। केमद्रुम योग का फल अच्छा नहीं। केमद्रुम योग होने से मनुष्य मलिन, दुःखित, निर्धन, दूसरे की मातहती में काम करने वाला, नगण्य होता है। केमद्रुम योग की इतनी निन्दा की गई है कि यदि राजवंश में पैदा हो तो भी उपर्युक्त बातें उसमें लागू हों। किन्तु पाठकों का विशेष ध्यान इस ओर दिलाया जाता है कि केवल किसी एक योग से नतीजे पर नहीं पहुँचना चाहिये। अब ऊपर जो अनफा, सुनफा और दुरुधरा — यह जो तीन योग पृथक्-पृथक् बताये गये हैं, उनका फल बताते हैं। जो सुनफा योग में पैदा होता है वह पार्थिव (राजा) हो या उसके समान हो। सुनफा योग वाला बुद्धिमान, धनवान् होता है और उसको ख्याति प्राप्त होती है। जो अनफा योग में पैदा होता है वह देखने में उत्तम होगा, शीलवान् हो, उसको सांसारिक भोग के साधन उपलब्ध हों, सन्तोषी और प्रसन्न हो, उत्तम वस्त्र धारण करे और उसका शरीर स्वस्थ रहे। अनफा योग वाला शीलवान होता है और समाज में प्रतिष्ठित होता है। जो व्यक्ति दुरुधरा योग में उत्पन्न हो वह त्यागशील हो, सुखी हो, धनी हो, उसको सवारियों की कमी न रहे और सांसारिक सुखों के अनेक साधन जैसे-जैसे उसे उपलब्ध हों वैसे-वैसे उनका भोग करता रहे।

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