The person born in the Sula Yoga will be cruel, of an angry temperament, and indigent. The man whose birth is in the Yuga Yoga will be heretical and without wealth. He who is born in the Gola Yoga will be without wealth, will commit sinful deeds, and associate with low people. He will be a bad artisan, indolent and short-lived.
यहाँ जो योग बताये गये हैं उनमें सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि — इन सातों ग्रहों का विचार करना चाहिये। राहु और केतु का विचार इनमें नहीं किया जाता। (१) यदि सूर्य आदि सात ग्रह पृथक्-पृथक् राशियों में हों तो वल्लकी योग होता है। इसे वीणा योग भी कहते हैं। जो इस योग में उत्पन्न होता है वह नाचने, गाने, बजाने का शौक़ीन और धनी होता है। (२) यदि सातों ग्रह कुल ६ राशियों में हों — चाहे किसी भी क्रम से — तो दाम योग होता है। जो इस योग में उत्पन्न होता है वह राजा के समान दूसरों का उपकार करने वाला और स्वयं त्यागी होता है। (३) यदि ७ ग्रह केवल ५ राशियों में हों तो पाश योग होता है। इस योग में उत्पन्न भोगी, धनी, सुशील और बन्धुयुक्त होता है। (४) यदि सातों ग्रह कुल ४ राशियों में हों तो केदार योग बनता है। इस योग वाले व्यक्ति को खेत, खेती और लक्ष्मी का शुभ योग होता है। (५) यदि कुल ग्रह ३ राशियों में हों तो शूल योग होता है। इस योग वाला व्यक्ति हिंसक प्रवृत्ति का, क्रोधी और दरिद्र होता है। (६) यदि सूर्य आदि सातों ग्रह केवल दो राशियों में हों तो युग योग होता है। इस योग में उत्पन्न होने वाले व्यक्ति पाखण्डी और धनहीन होते हैं। (७) यदि सूर्य आदि सातों ग्रह एक ही राशि में हों तो गोल योग होता है। जो गोल योग में उत्पन्न हो वह आलसी, अल्पायु, दरिद्री, पापी, म्लेच्छों की संगति में रहने वाला होता है। ऐसा व्यक्ति शिल्पकार्य में भी निपुण नहीं होता।
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