HomeLibraryPhaladeepikaCh.6Verse 40
Phaladeepika
Chapter 6 · yogādhyāya · योगाध्याय · Verse 40
Sanskrit · DevanāgarīPhaladeepika manuscript tradition
वीणायोगे नृत्तगीतप्रियोऽर्थी दाम्नि त्यागीभूतिश्चोपकारी ।
पाशे भोगी सार्थसच्छीलबन्धुः केदाराख्ये श्रीकृषिक्षेत्रेयुक्तः
IAST Transliteration
vīṇāyoge nṛttagītapriyo'rthī dāmni tyāgībhūtiścopakārī | pāśe bhogī sārthasacchīlabandhuḥ kedārākhye śrīkṛṣikṣetreyuktaḥ
TranslationsTwo-source verified
English

The person born in the Veena Yoga will be fond of dancing and music and will be wealthy. The man born in the Dama Yoga will be very liberal, a King and a benefactor. The person whose birth takes place in the Pasa Yoga will be opulent, devoted to enjoyment, and have good conduct and relatives. The man who has the Kedara Yoga in his nativity will be endowed with wealth and agricultural lands.

Hindi

यहाँ जो योग बताये गये हैं उनमें सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि — इन सातों ग्रहों का विचार करना चाहिये। राहु और केतु का विचार इनमें नहीं किया जाता। (१) यदि सूर्य आदि सात ग्रह पृथक्-पृथक् राशियों में हों तो वल्लकी योग होता है। इसे वीणा योग भी कहते हैं। जो इस योग में उत्पन्न होता है वह नाचने, गाने, बजाने का शौक़ीन और धनी होता है। (२) यदि सातों ग्रह कुल ६ राशियों में हों — चाहे किसी भी क्रम से — तो दाम योग होता है। जो इस योग में उत्पन्न होता है वह राजा के समान दूसरों का उपकार करने वाला और स्वयं त्यागी होता है। (३) यदि ७ ग्रह केवल ५ राशियों में हों तो पाश योग होता है। इस योग में उत्पन्न भोगी, धनी, सुशील और बन्धुयुक्त होता है। (४) यदि सातों ग्रह कुल ४ राशियों में हों तो केदार योग बनता है। इस योग वाले व्यक्ति को खेत, खेती और लक्ष्मी का शुभ योग होता है। (५) यदि कुल ग्रह ३ राशियों में हों तो शूल योग होता है। इस योग वाला व्यक्ति हिंसक प्रवृत्ति का, क्रोधी और दरिद्र होता है। (६) यदि सूर्य आदि सातों ग्रह केवल दो राशियों में हों तो युग योग होता है। इस योग में उत्पन्न होने वाले व्यक्ति पाखण्डी और धनहीन होते हैं। (७) यदि सूर्य आदि सातों ग्रह एक ही राशि में हों तो गोल योग होता है। जो गोल योग में उत्पन्न हो वह आलसी, अल्पायु, दरिद्री, पापी, म्लेच्छों की संगति में रहने वाला होता है। ऐसा व्यक्ति शिल्पकार्य में भी निपुण नहीं होता।

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