HomeLibraryPhaladeepikaCh.6Verse 20
Phaladeepika
Chapter 6 · yogādhyāya · योगाध्याय · Verse 20
Sanskrit · DevanāgarīPhaladeepika manuscript tradition
तिष्ठेयुः स्वगृहे सदा वसुमति द्रव्याण्यनल्पान्यपि
क्ष्मेशः स्यादमले धनी सुतयशः सम्पद्युतो नीतिमान् ।
श्रीमान् पुष्कलयोगजो नृपवरैः संमानितो विश्रुतः
स्वाकल्पाम्बरभूषितः शुभवचाः सर्वोत्तमः स्यात्प्रभुः
IAST Transliteration
tiṣṭheyuḥ svagṛhe sadā vasumati dravyāṇyanalpānyapi kṣmeśaḥ syādamale dhanī sutayaśaḥ sampadyuto nītimān | śrīmān puṣkalayogajo nṛpavaraiḥ saṃmānito viśrutaḥ svākalpāmbarabhūṣitaḥ śubhavacāḥ sarvottamaḥ syātprabhuḥ
TranslationsTwo-source verified
English

The person born in the Vasumat Yoga will always keep to his house, and will command plenty of money. He who has his birth in the Amala Yoga will rule over the earth, will be wealthy, will have sons, will be famous, prosperous and prudent. He who is born in the Pushkala Yoga will be wealthy, will be honoured by Kings, and become famous. He will be decorated with beautiful ornaments and clothes. He will be sweet-tongued, supremely good and a lord.

Hindi

इन श्लोकों में तीन योग दिये हैं — वसुमान्, अमला और पुष्कल। इन्हीं की क्रमशः व्याख्या करते हैं — (१) यदि समस्त शुभग्रह लग्न से गिनने पर ३, ६, १०, ११ — इन स्थानों में हों (यह लाज़मी नहीं कि एक तीसरे में, एक छठे, एक दसवें में, एक ग्यारहवें में हो — सब ग्रह उपचय स्थान में हों यह आवश्यक है) तो वसुमान् योग होता है। (लग्न से ३, ६, १०, ११ — इन स्थानों को उपचय स्थान कहते हैं।) (२) यदि चन्द्रमा जिस राशि में है, उस राशि से उपचय राशि में — (अर्थात् तीसरे, छठे, दसवें, ग्यारहवें इन राशियों में सब शुभग्रह हों — चाहे किसी राशि में एक या अधिक शुभग्रह हों — परन्तु ३, ६, १०, ११ इन्हीं चारों राशियों में सब शुभग्रह — बुध, बृहस्पति, शुक्र हों) तो भी वसुमान् योग होता है। (३) यदि लग्न या चन्द्रमा से दशम में शुभ ग्रह हो तो अमला योग होता है। (४) यदि लग्न का स्वामी और चन्द्रमा जिस राशि में हैं उनके स्वामी एक साथ केन्द्र में हों और किसी अधिमित्र के घर में हों, और कोई बलवान् ग्रह लग्न को देखे तो पुष्कल योग होता है। ऊपर जो चार योग बताये हैं उनका क्रमशः फल बताते हैं — (१) जो वसुमान् योग में पैदा होता है वह सर्वदा अपने घर में रहेगा और उसके पास बहुत द्रव्य होगा। पहले समय में परदेश में रहना कष्ट का लक्षण और अपने घर में रहना सुख का लक्षण समझा जाता था। (२) जो अमला योग में उत्पन्न हो वह भूमि का स्वामी, धनी, नीतिज्ञ, पुत्र और सम्पत्ति से युक्त, यशस्वी हो। (३) जो पुष्कल योग में उत्पन्न हो वह राजाओं द्वारा सम्मानित किया जावे, धनी और प्रसिद्ध हो, उत्तम वस्त्र और आभूषण धारण करे, शुभ वाणी बोले, बहुतों का मालिक हो और श्रेष्ठ पदवी को प्राप्त हो।

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