HomeLibraryPhaladeepikaCh.6Verse 19
Phaladeepika
Chapter 6 · yogādhyāya · योगाध्याय · Verse 19
Sanskrit · DevanāgarīPhaladeepika manuscript tradition
चन्द्राद्वा वसुमांस्तथोपचयगैर्लग्नात्समस्तैः शुभै\-
श्चन्द्राव्द्योम्न्य्मलाह्वयः शुभकगैर्योगो विलग्नादपि ।
जन्मेशे सहिते विलग्नपतिना केन्द्रेऽधिमित्रर्क्षगे
लग्नं पश्यति कश्चिदत्र बलवान्य्योगो भवेत्पुष्कलः
IAST Transliteration
candrādvā vasumāṃstathopacayagairlagnātsamastaiḥ śubhai\- ścandrāvdyomnymalāhvayaḥ śubhakagairyogo vilagnādapi | janmeśe sahite vilagnapatinā kendre'dhimitrarkṣage lagnaṃ paśyati kaścidatra balavānyyogo bhavetpuṣkalaḥ
TranslationsTwo-source verified
English

If all the benefics occupy Upachaya houses whether reckoned from the Lagna or the Moon, the resulting Yoga is termed Vasumat. When benefics occupy the 10th house counted from the Lagna or the Moon, the Yoga is called Amala. If the lord of the Rasi occupied by the Moon is in conjunction with the lord of the Lagna and be posited in a Kendra or in the house of a very friendly planet, and if at the same time a benefic planet possessing strength aspect the Lagna, the resulting Yoga is called Pushkala.

Hindi

इन श्लोकों में तीन योग दिये हैं — वसुमान्, अमला और पुष्कल। इन्हीं की क्रमशः व्याख्या करते हैं — (१) यदि समस्त शुभग्रह लग्न से गिनने पर ३, ६, १०, ११ — इन स्थानों में हों (यह लाज़मी नहीं कि एक तीसरे में, एक छठे, एक दसवें में, एक ग्यारहवें में हो — सब ग्रह उपचय स्थान में हों यह आवश्यक है) तो वसुमान् योग होता है। (लग्न से ३, ६, १०, ११ — इन स्थानों को उपचय स्थान कहते हैं।) (२) यदि चन्द्रमा जिस राशि में है, उस राशि से उपचय राशि में — (अर्थात् तीसरे, छठे, दसवें, ग्यारहवें इन राशियों में सब शुभग्रह हों — चाहे किसी राशि में एक या अधिक शुभग्रह हों — परन्तु ३, ६, १०, ११ इन्हीं चारों राशियों में सब शुभग्रह — बुध, बृहस्पति, शुक्र हों) तो भी वसुमान् योग होता है। (३) यदि लग्न या चन्द्रमा से दशम में शुभ ग्रह हो तो अमला योग होता है। (४) यदि लग्न का स्वामी और चन्द्रमा जिस राशि में हैं उनके स्वामी एक साथ केन्द्र में हों और किसी अधिमित्र के घर में हों, और कोई बलवान् ग्रह लग्न को देखे तो पुष्कल योग होता है। ऊपर जो चार योग बताये हैं उनका क्रमशः फल बताते हैं — (१) जो वसुमान् योग में पैदा होता है वह सर्वदा अपने घर में रहेगा और उसके पास बहुत द्रव्य होगा। पहले समय में परदेश में रहना कष्ट का लक्षण और अपने घर में रहना सुख का लक्षण समझा जाता था। (२) जो अमला योग में उत्पन्न हो वह भूमि का स्वामी, धनी, नीतिज्ञ, पुत्र और सम्पत्ति से युक्त, यशस्वी हो। (३) जो पुष्कल योग में उत्पन्न हो वह राजाओं द्वारा सम्मानित किया जावे, धनी और प्रसिद्ध हो, उत्तम वस्त्र और आभूषण धारण करे, शुभ वाणी बोले, बहुतों का मालिक हो और श्रेष्ठ पदवी को प्राप्त हो।

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