Malefics posited in the 6th, 8th and 12th places counted from the Lagna or other Bhava under consideration cause the destruction of the said Bhava. Benefics in such a position are not capable of producing good effects for the Bhava. So say the astrologers with respect to the several Bhavas.
जिस भाव का विचार करना हो उस भाव से छठे, आठवें, बारहवें यदि पापग्रह हों तो उस भाव का नाश करते हैं। उदाहरण के लिए आपको सप्तम भाव का विचार करना है तो सप्तम से छठा बारहवाँ, सप्तम से आठवाँ द्वितीय तथा सप्तम से बारहवाँ छठा, इन तीनों भावों में यदि पापग्रह हों तो सप्तम भाव की हानि करेंगे। जिस भाव से विचार करना हो उस विचारणीय भाव से छठे, आठवें, बारहवें यदि शुभग्रह हों तो उस विचारणीय भाव को विशेष पुष्ट करने में समर्थ नहीं होते। मान लीजिए सप्तम भाव का विचार करना है और उस भाव से छठे, आठवें या बारहवें किसी भाव में बृहस्पति है तो वह सप्तम भाव को बलवान बनाने में उतना समर्थ नहीं होगा। क्यों? क्योंकि उन स्थानों में बैठकर वह सप्तम को पूर्ण दृष्टि से नहीं देख सकेगा। यद्यपि लग्न से बारहवें घर में बैठकर सातवें भाव को तीन चरण दृष्टि से बृहस्पति देखता है, किन्तु सप्तम से छठे स्थान (शत्रुस्थान) में स्थित होने के कारण वह सातवें भाव के दृष्टिकोण से अच्छे स्थान में नहीं है।
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