Of the Lagna and other Bhavas examined in succession, whichever Bhava has its lord occupying the 8th place or obscured by the solar rays or in depression or in an inimical house while no benefic planets aspect or are associated with it, the result is the total destruction of such a Bhava. The bhava will be incapable of producing any good effect even if a benefic other than its lord similarly circumstanced occupy the Bhava; if a malefic should be in that position, the total destruction of the Bhava would be the result.
यदि किसी भाव का स्वामी (१) अष्टम स्थान में गया हो या (२) सूर्य की किरणों से अस्त हो या (३) नीच राशि में हो या (४) शत्रु क्षेत्र में गया हो और शुभग्रहों से युक्त या दृष्ट न हो तो उस भाव का नाश होता है अर्थात् उस भाव सम्बन्धी सुख की प्राप्ति नहीं होती प्रत्युत दुःख की प्राप्ति होती है। बहुत से लोगों के मत से विचारणीय भाव से अष्टम में जाने से ही नहीं, लग्न से अष्टम में जाने से भी ग्रह जिस भाव का स्वामी है उस भाव को बिगाड़ेगा। यदि कोई शुभग्रह भी नीचक्षेत्री या शत्रुक्षेत्री या अस्तंगत होकर किसी भाव में बैठ जाय और वहाँ पर शुभग्रह से युक्त या वीक्षित न हो तो जिस भाव का वह स्वामी है उस भाव को बिगाड़ेगा। यदि क्रूर ग्रह नीच, अस्तंगत या शत्रुक्षेत्री होकर किसी भाव में बैठा हो और शुभग्रह से युत या वीक्षित न हो तो जहाँ बैठा है उसे और भी बिगाड़ेगा। उदाहरण के लिए साथ की कुंडली में मंगल नीच राशि का होकर पंचम में है। यदि यह बृहस्पति से दृष्ट न होता तो और भी अधिक पंचम भाव को बिगाड़ता। बृहस्पति से दृष्ट है, इस कारण मंगल की क्रूरता कुछ कम हो गई है, फिर भी नीचस्थ मंगल ने इस जातक के दो ज्येष्ठ पुत्रों का नाश किया और इसके स्वयं के पेट में जलोदर का महारोग किया।
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