The destruction of each of the Bhavas from the Lagna onwards should be predicted by the astrologer to a querist during the Dasa-periods of planets which are very inimical to the planet owning the particular Bhava, or which occupy houses where there are no benefic dots in their Ashtakavargas.
इस श्लोक में यह बताते हैं कि किन ग्रहों की दशा-अन्तर्दशा में किन-किन भावों का नाश होगा। इस सम्बन्ध में दो बातें कहते हैं। (क) जो भावेश का अधिशत्रु ग्रह हो उस अधि-शत्रु ग्रह की दशा-अन्तर्दशा में भाव का नाश होगा। (ख) जिस ग्रह के अपने अष्टकवर्ग में जिस भाव में शून्य-शुभ बिन्दु हो अर्थात् कोई शुभ बिन्दु न हो उस भाव को भी ग्रह अपनी दशा-अन्तर्दशा में बिगाड़ता है। इसका अर्थ यह हुआ कि मान लीजिये शनि की महादशा है और शनि के अष्टकवर्ग में पंचम भाव में कोई शुभ बिन्दु नहीं है तो शनि की दशा-अन्तर्दशा में पंचम भाव सम्बन्धी कष्ट होगा। (ग) एक अन्य टीकाकार के मत से मान लीजिये सिंह लग्न है और सूर्य के अष्टकवर्ग में मीन में कोई शुभ बिन्दु नहीं है तो मीन राशि में जो ग्रह बैठे हों उनकी दशा-अन्तर्दशा में शरीर सम्बन्धी कष्ट होगा। इनके मत से जिस भाव का विचार करना है उस विचारणीय भावेश के अष्टकवर्ग में जिस राशि में कोई शुभ बिन्दु न हो उस राशि में बैठा हुआ ग्रह अपनी दशा-अन्तर्दशा में विचारणीय भाव का नाश करेगा।
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.