In the case of a planet owning two houses, that house which happens to be the Moolatrikona one will predominate and its effects alone will be felt in full while the effects of his own house will be half. The effects of both the Bhavas will come to pass in the Dasa of the planet, the first half of the Dasa-period being monopolised by the effects of the Bhava that comes first in order. This is the opinion of some. There are others who hold that a planet posited in an odd house will have the effect of that house felt first while the one that occupies an even house will have its effect in the first half of the Dasa.
यदि कोई ग्रह दो घरों का मालिक है तो वह अधिक फल उस घर का दिखायेगा जो उसकी मूल त्रिकोण राशि है। किस ग्रह की कौन-सी मूल त्रिकोण राशि है यह पहले बताया जा चुका है (देखिये पृष्ठ २१)। उदाहरण के लिये सिंह लग्न की कुण्डली में बृहस्पति ५वें और ८वें घर का मालिक है। पंचम घर शुभ है, अष्टम घर अशुभ है; ऐसी स्थिति में बृहस्पति की मूल-त्रिकोण राशि पंचम में होने से मुख्य फल पंचमेश होने का करेगा और अष्टमेश होने का फल उसका आधा करेगा। अर्थात् यदि पंचमेश होने का १६ आने शुभ फल तो अष्टमेश होने का ८ आने अशुभ फल। ऐसे ग्रह की दशा में दोनों भावों के स्वामी होने का शुभ या अशुभ फल होगा। अर्थात् प्रस्तुत उदाहरण में बृहस्पति पंचमेश और अष्टमेश दोनों स्वामित्व का फल दिखावेगा। यहाँ यह भी निर्णय करते हैं कि पहले किस राशि के स्वामित्व का फल दिखावेगा। इसके उत्तर में कहते हैं कि लग्न से गिनने पर जो राशि पहले आवे उस राशि के स्वामित्व का प्रभाव पहले होगा और जो राशि बाद में होगी उसका प्रभाव बाद में होगा। परन्तु मन्त्रेश्वर महाराज स्वयं लिखते हैं कि कुछ अन्य विद्वानों का मत है कि यदि विचारणीय ग्रह ऊनी (विषम) राशि में बैठा है तो उसकी दो राशियों में जो ऊनी राशि है उसका फल पहले दिखावेगा और अपनी दूसरी राशि का फल बाद में। किन्तु यदि ग्रह किसी सम राशि में बैठा है तो उसकी दो राशियों में जो समराशि है उसके स्वामित्व का फल पहले दिखावेगा और ऊनी राशि का फल बाद में दिखावेगा।
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