The lord of the Lagna though malefic will only promote the growth of the Bhava it occupies. If he should also happen to own any of the Dusstthanas (6th, 8th, 12th), the effect of his ownership of the Lagna alone will predominate and not that of the other one. For example, if Mars owning the Lagna occupy Simha or Meena identical with the 5th house and be aspected by a benefic, astrologers declare that the person concerned will beget sons very soon.
इस श्लोक में यह बताया गया है कि लग्नेश स्वयं चाहे शुभग्रह हो चाहे पाप-ग्रह हो वह जहाँ बैठ जाता है उस स्थान की वृद्धि ही करता है। ज्योतिष शास्त्र का यह माना हुआ नियम है कि ६, ८, १२ ये दुःस्थान हैं। अब शंका यह होती है कि लग्न का स्वामी होना तो शुभ होता है किन्तु यदि कोई ग्रह लग्न के साथ-साथ छठे या आठवें घर का भी स्वामी हो तो वह कैसा फल करेगा। इस शंका का समाधान करते हुए कहते हैं कि लग्न का स्वामी होने के कारण जो शुभता है वही मुख्य रहेगी। अर्थात् मान लीजिये वृश्चिक लग्न है और मंगल लग्न और छठे घर का मालिक हुआ या मेष लग्न हो तो मंगल लग्न और आठवें घर का मालिक हुआ। अब यदि मंगल पंचम में बैठा हो तो वह षष्ठेश अथवा अष्टमेश होने के कारण सन्तान कष्ट करेगा या लग्नेश पंचम में बैठा है इस कारण सन्तान सम्बन्धी शुभफल दिखावेगा? इसके उत्तर में कहते हैं कि यदि मंगल लग्नेश-षष्ठेश अथवा लग्नेश-अष्टमेश होकर पाँचवें घर में बैठा हो और शुभ-ग्रह से देखा जाता हो तो शीघ्र ही पुत्र-प्राप्ति करावेगा।
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