HomeLibraryPhaladeepikaCh.20Verse 58
Phaladeepika
Chapter 20 · antardaśāphala · अन्तर्दशाफल · Verse 58
Sanskrit · DevanāgarīPhaladeepika manuscript tradition
तत्तद्भावात्व्ययथस्य तद्भावव्ययपस्य च ।
वीर्यहीनस्य खेटस्य पाके मृत्युमवाप्नुयात्
IAST Transliteration
tattadbhāvātvyayathasya tadbhāvavyayapasya ca | vīryahīnasya kheṭasya pāke mṛtyumavāpnuyāt
TranslationsTwo-source verified
English

Death (of the relative signified by the particular Bhava) will take place in the main Dasa of the planet in the 12th house (reckoned from that Bhava) or of the one owning it whichever is weaker.

Hindi

यदि कोई ग्रह वीर्यहीन अर्थात् बलहीन हो तो उसकी दशा-अन्तर्दशा में मृत्यु होगी। किसकी? जिस भाव से निर्बल ग्रह द्वादश में बैठा है उस भाव से जिसका विचार किया जाता है उसकी, या जिस भाव का दुर्बल ग्रह व्ययेश है, उस भाव से जिसका विचार किया जाता है उसकी। एक उदाहरण द्वारा यह स्पष्ट किया जाता है। मान लीजिये कोई दुर्बल ग्रह द्वितीय का मालिक होकर नवम में बैठा है तो इसकी दशा-अन्तर्दशा में जातक के भाई की या पिता की मृत्यु हो सकती है। क्यों? वह द्वितीयेश है, अर्थात् तीसरे घर का व्ययेश है (तीसरे घर से १२वाँ लग्न दूसरा घर हुआ, इसलिये द्वितीयेश तृतीय स्थान का व्ययेश हुआ), और ऊपर बताया जा चुका है कि जिस भाव का व्ययेश दुर्बल हो उस भाव का नाश होता है। तृतीय से भाई का विचार किया जाता है, इसलिये बलहीन द्वितीयेश की दशा में भाई को कष्ट कहना। दूसरी बात जो इस श्लोक में बतायी है वह यह कि जिस भाव के व्यय-स्थान में दुर्बल ग्रह बैठे, उस भाव को भी कष्ट पहुँचाता है। ऊपर के उदाहरण में दशम से यदि पिता का विचार किया जाय तो नवम में दुर्बल ग्रह बैठा हुआ दशम के व्यय में होने के कारण पिता को कष्ट पहुँचावेगा। नतीजा यह निकला कि दुर्बल ग्रह जिस भाव का व्ययेश हो उसका भी नाश करे और जिस भाव के व्यय में बैठे उसका भी नाश करे।

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