If the planet whose Bhukti is in progress should during the course of his transit at the time pass through his depression or inimical house or become eclipsed, there will be much misery. Should he pass through his own, or exaltation house or be retrograde, the effects will then be good.
जिस ग्रह की दशा या अन्तर्दशा जा रही हो वह गोचरवश यदि अपनी नीच राशि में या शत्रु राशि में जा रहा हो, या सूर्य के समीप होने के कारण अस्त हो जावे, तो ऐसी स्थिति में वह ग्रह कष्ट देगा। प्रायः यही बात ऊपर के ३५वें श्लोक में भी बतायी गयी है। अन्तर केवल यह है कि ऊपर ३५वें श्लोक में यह कहा है कि 'यदि वह दशानाथ जन्म के समय भी बलहीन हो' किन्तु यह बात ३७वें श्लोक में नहीं कही गयी। इससे परिणाम यह निकला कि जिस ग्रह की महादशा हो वह जब गोचरवश अस्त होता है या अनिष्ट राशि को प्राप्त होता है तो कष्टकारक होता है। अब दूसरी बात लीजिये। जिस ग्रह की दशा या अन्तर्दशा हो वह जब गोचरवश अपनी स्वराशि या अपनी उच्चराशि को प्राप्त होता है या वक्र हो जाता है तो उस समय अच्छा फल देता है।
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