When a planet whose Dasa is in progress happens to pass through (in transit) his Swakshetra, exaltation or a friendly house, he will promote the prosperity of the Bhava it represents when counted from the Lagna, provided the said planet is endowed with full strength at the birth time as well.
यह देखिये कि जिस ग्रह की महादशा जा रही है वह महादशा के समय लग्न से किस भाव में जा रहा है। इस श्लोक में यह नयी बात बतायी गयी है कि एक ही महादशा-नाथ — जब उसकी महादशा जा रही हो — तब गोचरवश भिन्न-भिन्न स्थानों में रहता हुआ भिन्न-भिन्न फल करता है। महादशा-स्वामी यदि जन्म-कुण्डली में भी बलवान हो, तो जब उसकी महादशा के समय गोचरवश अपनी उच्च, स्वराशि या मित्र राशि में रहता हुआ लग्न से जिस भाव में भ्रमण करता है उस भाव का पुष्टि-कारक होता है। मान लीजिये किसी की कुण्डली में राहु बड़ा बलवान है और राहु की महादशा है, तो जब गोचरवश जन्म-लग्न से ११वें आवेगा तब धन-लाभ करावेगा; जब जन्म-लग्न से दशम में आवेगा तब पदोन्नति-कारक होगा; जब नवम में आवेगा तब भाग्योदय करेगा — इस प्रकार महादशा-नाथ के गोचरवश फल में तारतम्य कर विचार करना चाहिये।
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