If Jupiter, the lord of the house occupied by the Moon and the ruler of the Lagna, be in Kendras at a birth, the middle portion of the life is good. Planets in (Prishtodaya) signs give good results in the end; those in (Ubhayodaya) signs, in the middle; and those in the (Sirshodaya) signs, in the beginning. (Cf. Bṛhat Jātaka XXII-5).
यदि (१) बृहस्पति, (२) जन्म-राशि का स्वामी, (३) जन्म-लग्नेश — ये तीनों जन्म-लग्न से केन्द्र में हों तो जीवन के मध्य-काल में सुख-प्रद होते हैं। अब एक दूसरी बात और बताते हैं। यदि कोई ग्रह शीर्षोदय राशि में हो तो वह अपनी महादशा के प्रारम्भिक काल में ही अपना विशेष फल दिखाता है। यदि कोई ग्रह पृष्ठोदय राशि में हो तो वह अपना फल अपनी महादशा के अन्तिम काल में विशेष दिखाता है। यदि कोई ग्रह उभयोदय राशि में है तो वह अपना फल महादशा के मध्य काल में विशेष दिखाता है। कौन सी राशि पृष्ठोदय होती है, कौनसी शीर्षोदय, यह प्रथम अध्याय के आठवें श्लोक में बताया है। यहाँ यह विशेष कथन है कि मिथुन राशि फलदीपिका के मत से उभयोदय है। एक अन्य बात इन राशियों के विषय में अन्यत्र कही गयी है वह भी यहाँ बताते हैं: पृष्ठोदय राशि में क्रूर ग्रह हो तो अत्यन्त अशुभ और शुभ ग्रह हो तो कम अशुभ। शीर्षोदय राशि में शुभ-ग्रह हो तो पूर्ण शुभ, क्रूर-ग्रह हो तो कम अशुभ। उभयोदय में मिश्रित फल।
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