If in the order of main Dasas, the fourth happens to belong to Saturn, the sixth to Jupiter, the fifth to Mars or Rahu, every one of these will prove dangerous. So also will be the Dasa period of a planet occupying the end of a sign or owning a Dusthāna (6th, 8th or 12th).
निम्नलिखित दशायें कष्टकारक होती हैं: (१) शनि की दशा यदि चौथी हो; (२) बृहस्पति की दशा यदि छठी हो; (३) मंगल और राहु की दशा यदि पाँचवी हो; (४) किसी राशि के अन्तिम अंश पर स्थित यदि कोई ग्रह हो — अर्थात् यदि कोई ग्रह किसी भी राशि में ३०वें अंश पर हो; (५) दुःस्थान अर्थात् ६, ८, १२ के मालिक की दशा। यदि किसी का जन्म मंगल की महादशा में हो तो भौ. रा. गु. श. क्रम से — शनि की दशा उसे चौथी होगी। यदि किसी का जन्म शुक्र की महादशा में हो तो राहु की दशा पंचम होगी और गुरु की दशा षष्ठ होगी। इसी प्रकार यदि किसी का जन्म केतु की महादशा में हो तो मंगल की दशा उसे पंचम होगी।
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