During the Dasa period of a malefic planet when the sub-period of a planet ruling the 3rd, the 5th or the 7th star (reckoned from the natal star) is in progress, or the Bhukti of the lord owning the Janma Rasi or the 8th house therefrom is passing, the person concerned will have troubles from thieves and enemies and will suffer much misery.
यदि किसी क्रूर ग्रह की महादशा हो और उसमें किसी ऐसे ग्रह की अन्तर्दशा हो जो जन्म-नक्षत्र से तीसरे, पाँचवे या सातवें नक्षत्र का मालिक हो, तो ऐसी परिस्थिति में जातक के घर में चोरी होती है, उसे शत्रु-पीड़ा होती है और वह अति दुःखित रहता है। किस नक्षत्र का कौन सा स्वामी है यह पहले बताया गया है। मान लीजिये किसी व्यक्ति का रेवती नक्षत्र में जन्म है तो रेवती, अश्विनी, भरणी — भरणी तृतीय नक्षत्र हुआ; रोहिणी पंचम नक्षत्र हुआ; आर्द्रा सप्तम नक्षत्र हुआ। भरणी का स्वामी शुक्र है, रोहिणी का चन्द्रमा, आर्द्रा का राहु। ऐसी स्थिति में किसी क्रूर ग्रह की दशा हो — मान लीजिये शनि की महादशा हो — तो उसमें शुक्र, चन्द्र और राहु की अन्तर्दशा कष्टमय जायेगी। इसी प्रकार क्रूर ग्रह की दशा हो और उसमें जन्म-राशि के स्वामी की अन्तर्दशा हो या जन्म-राशि से अष्टम राशि के स्वामी की दशा हो तो चोर-पीड़ा, शत्रु-पीड़ा और दुःख आदि दृष्ट होते हैं।
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