Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 11 · · Verse 83
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

अन्वयः--प्रवेशात्‌ निर्गंम॑ (कृत्वा) तस्मात्‌ (निर्गगदिनात्‌ू) नवमे तिथो नवमे नक्षत्रे तथा च नवमे वारे प्रवेश: कदाचन नव कुर्यात्‌ ॥| ८५२१। घर में पहुँचने की तिथि नक्षत्र वार से नवम तिथि नक्षत्र वार में यात्रा और यात्रा के तिथि नक्षत्र वार से नवम तिथि नक्षत्र वार में गृहप्रवेश कदापि न करे। प्रयाण-नवमी प्रवेश-तवमी नवमी तिथि इनमें प्रवेश के दिन से नवम दिन प्रयाण-नवमी और यात्रा केदिन से नवम दिन प्रवेश-नवमी कही जाती है। नवमी तिथि प्रसिद्ध ही है, ये तीनों यात्रा में निषिद्ध हैं ॥॥ ८२ ॥। *पौषादि चार महीनों में पानी बरसना अकाल-वृष्टि है । १९८ |! | | [| | | मुह॒ृत्तंचिन्तामणि यात्राकाल में कतंव्य विधि अग्नि हुत्वा देवतां पूजयित्वा नत्वा विप्रानचंयित्वा दिगीशम्‌ । दत्त्वा दान ब्राह्मणेभ्यो दिगीशं ध्यात्वा चित्ते भूमिपालोइधिगच्छेत्‌ ॥ ८३॥

Have a question about this verse?

Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.

Ask about this verse