Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 11 · · Verse 82
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

अन्वयः--यदा महीपते: एकदिने पुरात्‌ पुरे गमनप्रवेशकों भवेतां (तदा) भवारशलप्रतिशक्रयोगिनी: दिवसे निर्गमप्रवेशाौ स्‍त: (विचायें:) ॥ ८०-८१ ॥। पण्डित: कदापि नैव विचारयेत्‌ । यदि महीपतेः एकस्मिन्‌ तहिं तत्न सुधिया प्रवेशकाल: विचारये: यात्रिक: न जहाँ एक ही दिन में राजा कागमन और भ्रवेश हो अर्थात्‌ किसी गाँव सेचलकर अन्य अभीष्ट गाँव में पहुँचना हो, तो पण्डित को चाहिए कि नक्षत्रशुल, वारशूल, सम्मुख शुक्र, योंगिनी इत्यादि न विचारे, केवल पंचांगशुद्धि देखकर यात्रा करे ॥ ८०॥ और जहाँ एक ही दिन में राजा की यात्रा और प्रवेश हो अर्थात्‌ किसी गाँव सेचलकर अन्य अभीष्ट गाँव में पहुँचना हो वहाँ पहुँचने हीका काल विचारने योग्य होता है न कि यात्रा का काल ॥। ८५१५ ॥। यात्रा में त्रिनवमी दोष प्रवेशान्निगं मं तस्मात्प्रवेशं नवमे तिथों । नक्षत्र च तथा बारे नव कुर्यात्तदाचन ॥ ८२॥

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