Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 11 · · Verse 79
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

डे 7की जा: >ताक के क्कक 7७नीकताक"जार अन्वयः--यदि विलग्नबलं ज्ञात्वा सुप्रशस्तें: चेतोनिमित्त शकुन्ने: उ्यंधिपः प्रयाति (तदा) खलु [निश्चयेत] सिद्धि: भवेत्‌। अथ पुनः शकुनादितोईपि चेतोविशुद्धिः अधिका (भवत्ति) तां (चेतोविशुरद्धि) विना च न इयात्‌ ॥ ७८ ॥। चित्त की प्रसन्नता, शुभ अंगस्फुरणादि तनिमित्त, शुभ शकुन इन सबके सहित लग्नबल जानकर याद राजा चलता है तो वाड्छित कारें की सिद्धि होती है। परन्तु इनमें शकुनादि से चित्त की प्रसन्नता अधिक गिनी जाती है, इसलिए यदि चित्त की प्रसन्नता होऔर शुभ शकुनादि भी हों तो यात्रा करे और यदि सब वस्तु शुभ हों परंतु चित्त की शुद्धि नहो तोयात्रा न करे ।। ७८॥। यात्राप्रतिबन्धक कार्य ब्रतबन्धनदंवतप्रतिष्ठाकरपीडोत्सवसृतकासमाप्तो । न कदापि चलेदकालविद्यद्घनवर्षातुहिने5पि सप्तरात्रम्‌ ॥ ७९॥

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