Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
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अन्वय:--इषभासि सिता विजयादशमी शूभकमंसु सिद्धिकरी कथिता । श्रवणक्षेयुता सा सुतरां शभदा (स्थात्) नृपतेः गमे तुजयसन्धिकरी (भवति) ॥ ७७॥ आश्विन मास की शुक्ल दशमी विजयासंज्ञक है। यह यात्रा करनेवालों के सम्पूर्ण कार्यों कीसिद्धि करानेवाली है । यदि यह श्रवण नक्षत्र से युक्त हो तो अति ही शुभ फल देनेवाली होती है। विशेष करके राजा की यात्रा में विजय अथवा सन्धि करानेवाली होती है ॥| ७७ ॥। यात्रा में चित्तश॒द्धि की प्रधानता चेतोनिमित्तशकुन रतिसु प्रशस्तसॉत्वा विलग्नबलसुव्यंधि:ः . प्रयाति। सिद्धिभंवेदथ पुनः शकुनादितो5पि चेतोविशद्धिरधिका न च तां विनेयात् ॥ ७८॥
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