Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
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अन्वयः--कुज: सहजे, भार्गवश्च निधनग:, बुध: मंदने, रवि: अरौ, ग्रुः तनौ । अथ चेत् इज्यसितभानवः जलत्विगता: सौरिरुधिरौ रिपुस्थितो (तदा) हि जय: स्यथात् ।4। ७५ ।। अथवा तीसरे स्थान में मंगल, आठवें स्थान में शुक्र, सातवें स्थान में बुध, छठे स्थान में सूर्य और लग्न में बृहस्पति हो, अथवा बृहस्पति, शुक्र, सूर्य ये ग्रह चौथे और तीसरे स्थानों में होंऔर शनेबचर, मझ्ल ये दोनों छठे स्थान में हों, ऐसे योग में भी यात्रा करनेवाले राजा की जय होती है ।। ७५॥ यात्राकालिक योगादि _एको ज्ञेज्यसितेषु पत्चमतप:ःकेन्द्रेष योगस्तथा दो चेत्तेष्वधियोग एबु सकला योगाधियोगः स्मृतः । योगे क्षेमसथाधियोगगमने क्षेमं रिपृण्णां वर्ध चाथो क्षेमयशो:वनोइच लभते योगाधियोगे श्रजन् ॥ ७६॥
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