Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi
अन्वयः--चेत् सितजीवभौमबुधभानुतनूजा: क्रमतः तनुमन्मंथारिहिबुकत्रिगहे (स्थिता:) वा ग्रुदिने अखिलखेट: [सूर्याद्:] क्रमत: अरिसोदरखशात्रवहो राहिबुकायग: (तदा जय: स्यात् ) ॥ ७४ ।। अथवा लगन में शुक्र, सातवें बृहस्पति, छठे मंगल, चौथे बुध, और तीसरे स्थान में शनेशचर हो, अथवा बृहस्पति के दिन छठे स्थान में सूर्य, तीसरे ह १९५ ू स्थान में चन्द्रमा, दशवें स्थान में मंगल, छठे स्थान में बुध, लग्न में ब्रृहस्पति, चौथे स्थान में शुक्र, गेरहवें स्थान में शनेश्चर हो, ऐसे योग में भी यात्रा करनेवाले राजा की जय होती है ॥| ७४॥। सहजे कुजों निधनगहच भागंवों मदने बुधो रविररौ तनोौ गुरु: । अथ चेत्स्युरिज्यसितभानवो जलत्रिगता हि सौरिरुधिरों रिपुस्थितो ॥ ७५॥
Have a question about this verse?
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.