Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 11 · · Verse 72
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

१९४ मुहत्तचिन्तामणि अन्वयः--शशिजे रिपुलग्नकर्महिबुके (स्थिते) शुभनभोगमने: परिवीक्षिते, अशुभनामधरे: (पापेः) व्ययलग्नमन्मथगृहेष्‌ परिवर्जितेष्‌ [ स्थानेष्‌ ] स्थितेः (जय: स्यात्‌) ।। ७१॥। अथवा शुभग्रहों से दृष्ट बुध छठे या लग्न या दशरव्वें या चौथे स्थान में हो और लग्न, बारहवें, सातवें इन स्थानों को छोड़ अन्यत्र शुभग्रह स्थित हों, ऐसे योग में यात्रा करनेवाले राजा की जय होती है ।| ७१ ॥ लग्ने यदि जीवः पापा यदिलाभे कमंण्यपि चेद्राज्याधिगमः स्थात्‌। घने बुधशुक्रो चन्द्रों हिबुके वा तद॒त्फलमुक्त सर्वेर्मुनिवर्यें: ॥॥ ७२॥

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