Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi
अन्वयः--यदि जीव: लग्ने, यदि पापा: लाभ अपि वा कर्मणि चेत (तदा) राज्याधिगम: स्यात्। वा बधशुक्रौ द्यूने, चन्द्र: हिबके (तदा) सर्वे: मुनिवर्य: तद्त् फल उक्तम् ॥ ७२ ॥। >**--+72-32><>>अऑि 5 कमाए दृकि दम म्या काका पाकर कलफमय ७००4 अथवा यदि लग्न में बृहस्पति हो और पापग्रह गेरहवें, दशवें इन दोनों स्थानों में हों, ऐसे योग में यात्रा करनेवाले राजा को राज्य मिलती है। अथवा बुध, शुक्र ये दोनों सातवें स्थान में हों और चन्द्रमा चौथे स्थान में हो, ऐसे योग में यात्रा करनेवाले राजा को भी राज्य मिलती है ॥ ७२ ॥। रिपुतनुनिधने शुक्रजीवेन्दवों ह्यथ बुधभृगुजों तुयंगेहस्थितो । सदन भवनगदचन्द्रमा वास्बुगः शशिसुतभगुजान्तर्गतदचन्द्रमा: ॥ ७३॥।
Have a question about this verse?
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.