Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
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Hindi
अन्वयः-चेत् बली हिमकिरणसुतः तनौ, त्रिदशपतिगुरुः केन्द्रस्थितः, च यदि निबंल: चन्द्रमा: व्ययगृहसहजारि धर्मस्थितो भवति (तदापि जय: स्यात् ) ॥ ६४ ॥ अथवा यदि बली होकर बुध लग्न में और बृहस्पति केन्द्र में स्थित हो और चन्द्रमा निबंल होकर बारहवें, तीसरे, छठे, नें इनमें सेकिसी स्थान में स्थित हो, ऐसे योग में यात्रा करनेवाले राजा की विजय होती है ॥ ६९॥। अशृुभखग रनवाष्टमदस्थहिबुकसहोदरलाभगहस्थ: । कविरिह केन्द्रगगीष्पतिद्ृष्टो वसुचयणलाभकर: खलु योगः ॥ ७० ॥
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