Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
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Hindi
अथवा बृहस्पति या शुक्र लग्न में, सूर्य छठे स्थान में, बुध पाँचवें स्थान में, शनैइचर दशवें स्थान में तथा शुक्र चौथे स्थान में हो, ऐसे योग में राजा की यात्रा माता के समान हितकारिणी होती है ।। ६८ ॥। हिमकिरणसुतो बली चेत्तनौ त्रिदशपतिगुर्रह केन्द्रस्थितः । व्ययगहसहजारिधसंस्थितो यदि च भवति निरबंलइचन्द्रमाः ॥ ६९॥
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