Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 11 · · Verse 67
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

बूधशुक्रों हिबुकअन्वयः--विब॒धगुरो समुदयगे, हिमकिरणे मदनगते (सति) यदि ६॥। गतौ, खलखचरा:सहजगता: (तदा जय: स्यथात्‌ )॥६ में हो, और अथवा बृहस्पति यदि लग्न में होऔर चन्द्रमा सातवें स्थान में पापग्रह बुध, शुक्र ये दोनों चौथे स्थान में स्थित हों और तीसरे स्थान य होती है ॥| ६६ ।। स्थित हों, ऐसे योग में यात्रा करनेवाले राजा की विज त्रिदशगुरुस्तनुगो मंदने हिसकिरणो रविरायगतः । सितशशिजावपि कमंगतौ रविसुतभूमिसुतो सहजे ॥ ६७॥

Have a question about this verse?

Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.

Ask about this verse