Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi
: ) (अत्न) अन्वय:--यदि रवि: उदये, सौरि: अरिग:, शशी दशमें अपि (स्थित है| यदि वसुधापति: याति (तदा ) रिपुवाहिनी वशं एति ॥ ६४ ॥ अथवा यदि लग्न में सूर्य, छठे स्थान में शनेश्चर वा दशरवें स्थान में चन्द्रमा हो, ऐसे योग में यदिं राजा यात्रा करे तो शत्रु की सेना उसके अधीन हो जाती है ॥ ६४ ।। तनौ शनिकुजो रविदंशमभे बुधो भुगुसुतोईषि लाभदशसे । त्रिलाभरिपु्भेषु भूसुतशनी गुरुज्ञभुगुजास्तथा बलयुताः ॥ ६५॥
Have a question about this verse?
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.