Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 11 · · Verse 64
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

अन्वयः--शशिपुत्र: वित्तगत: वासरनाथः श्रातरि (स्थित:), भृगृपुत्रे लग्नगते (सति) सर्वे (शत्रवः) शलभा: इव स्यः ॥। ६३ ।। मुहत्तचिन्तामणि १९२ |! । . अथवा दूसरे स्थान में बुध, तीसरे स्थान में सूये और लग्न में शुक्र हों, ऐसे योग में यात्रा करनेवाले राजा के सामने शरत्रुगण इस प्रकार के हो जाते हैं जैसे अग्नि केसामने शलभ ॥ ६३ ॥। उदये रवियंदि सौरिररिगः शशी दक्षमे5पि । वसुधापतियंदि याति रिपुवाहिनी वह्ञमेति ॥ ६४॥

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