Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 11 · · Verse 63
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

अन्वयः--चन्द्रे यूने, अर्के समृदयगं, जीवे शुक्रे विदि धनसंस्थे, ईद्ग्योगे नरेश: चलति (तदा) गरुड़: अहीन्‌ इव शत्रन्‌ जेता ॥| ६२ ।। अथंवा यदि सातवें स्थान में चन्द्रमा, लग्न में सूर्य और गुरु, शुक्र, बुध ये तीनों ग्रह दूसरे स्थान में हों ऐसे योग में चलनेवाला राजा इस प्रकार शत्रुओं को जीतता है जसे गरुड़ सर्पों को जीतता है ॥ ६२॥ वित्तगतः शशिपुत्रों भ्रातरि वासरनाथः । लग्नगते भुगुपुत्रे स्युः शलभा इव सर्वे ॥ ६३॥

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