Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi
अन्वयः-- (यदि ) देवपुरोधा: लग्नगतः स्यात्, शेषनभोग: लाभधनस्थे: (तदा राज्ञो विजय:) ॥ ६१ || अथवा यदि लग्न में बृहस्पति हो और गेरहवें, दूसरे इन दोनों स्थानों में शेष सब ग्रह हों, ऐसे योग में यात्रा करनेवाले होती है ।। ६१॥ राजा की विजय थाने चन्द्रे समुदयगेषक ज़ीवे शक्ते विदि धनसंस्थे। ईद्ग्योगे चलति नरेशो जेता शत्रून् गरुड इवाहीन ॥ ६२ ॥
Have a question about this verse?
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.