Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi
अन्वयः--रवि: सहजे, शशी दशमे, तथा शनिमगलौ रिपुगृहे, सितः सुते, बुध: हिब॒के, गुरु: अपि लग्नगः (यदि स्यात्) इह (अस्मिन् समये यः) नृप: प्रचलित: स अचिरात् अरीन् जयति ॥| ५८ ॥। यदि लग्न से तीसरे स्थान में शुक्र और ददवें स्थान में चन्द्रमा हो, छठे स्थान में शनि, मंगल ये दोनों हों, पाँचवें स्थान में शुक्र, चौथे स्थान में बुध, लग्न में बृहस्पति हो, ऐसे योग में चला हुआ राजा शीक्र ही अपने शत्रुओं को जीतता है ॥ ५८॥। ८ यात्राप्रकरण भ्रातरि सौरिभूंमिसुतो वेरिणि लग्ने देवगुरुः । आयगते5क॑ शात्रुजयब्चेदनुकूलो दत्यगुरु:॥ ५९॥।
Have a question about this verse?
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.