Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 11 · · Verse 58
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

अन्वयः--धरणिपतीनां योगात्‌, भूदेवानां ऋक्षगुण, अपि चौराणां शुभशकुन: सिद्धि: उकता, मन्‌जानां मुहूर्त्तात्‌ अपि सिद्धि: भवति ॥ ५७ ॥। आगे कहे हुए योग-लग्न-बल से राजाओं की, चन्द्र-तारा-बल-सहित विहित नक्षत्रादि में की हुई यात्रा ब्राह्मणों की, आगे कहे हुए शकुनों से चोरों की और मुद॒त्त-बल से अन्य मनुष्यों की यात्रा सिद्धिदायक होती है ॥। ५७॥ योगयात्रा सहजे रविदंशमे शशी तथा शनिमड्भलौ रिपुगहे सितः सुते। हिबुके बुधो गुरुरपीह लग्नगःस जयत्यरीन्‌ प्रचलितो5चिरान्नूप: ॥॥ ५८॥।

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