Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 11 · · Verse 60
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

अन्वयः--भ्रातरि सौरिः, वेरिणि भूमिसुत:, लग्ने देवगुरु, आयगतः अके:, च (तथा ) चेत्‌ देत्यगुरु: अनुकूल: (तदा) शत्रुजयः स्यात्‌ ॥ ५८ ॥। अथवा तीसरे स्थान में शनेश्चर, छठे स्थान में मंगल, लग्न में बृहस्पति, ग्यारहवें स्थान में सूये होऔर यदि शुक्र पीछे या वामभाग में हो, ऐसे योग में चले हुए राजा की जय होती है ॥ ५९॥ तनौ जीव इन्दुमतोवरिगो5क: प्रयातो महीन्द्रो जयत्येव शत्रून ॥ ६० ॥

Have a question about this verse?

Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.

Ask about this verse