अन्वयः--पूर्वां विना उष:काल:, पश्चिमां विना गोधूलि:, उत्तरां विना निशीथ: याने [यात्रायां ]सन् स्यात, तथा याम्यां' बिना अभिजित् (मुंह॒तें:) सन् स्थात् ॥ ५४ ॥ पूर्व दिशा को छोड़ अन्य दिशाओं को यात्रा करने के लिए प्रात:काल, पश्चिम को छोड़ अन्य दिश्ञाओं को यात्रा करने के लिए गोधूलिकाल, उत्तर दिशा को छोड अन्य दिशाओं को यात्रा करने केलिए आधी रात का समय और दक्षिण दिशा को छोड़ अन्य दिशाओं को यात्रा करने के लिए अभिजित् मुहत्ते शुभ होता है, अर्थात् प्रातःकाल पूर्व दिशा को, सायंकाल पश्चिम दिशा को, आधीरात में उत्तर दिशा को, मध्याह्ष में दक्षिण दिशा को अभिजित् मुहत्त में यात्रा नकरनी चाहिए | ५४॥ लग्नादि बारह भावों के नाम लग्नाउ्ावाः क्रमाहेह १ कोश २ धानुष्क ३ वाहनम् ४ । मन््त्रो ५ एईरि ६ सागं ७ आयुदच ८ हत ९ व्यापारा १० गम ११ व्ययाः: १२॥ ५५॥।
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