अन्वयः--देहकोशधानृष्कवाहनम्, मन्त्र:, अरिः, मार्ग, आयु: च [तथा ] हृढचापारागमव्यया: [इमे ] क्रमात् लग्नात् भावाः (ज्ञेया:) ॥ ५५॥ लग्नादि क्रम से देह १, कोश २, धानुष्क ३, वाहन ४, मन्त्र ५, अरि ६, मार्ग ७, आयु ८५, हृदय ९, व्यापार १०, आगम ११, व्यय १२ ये बारह भाव होते हैं, अर्थात् लग्न की देह, दूसरे की कोश, तीसरे की धानुष्क, चौथे का वाहन, पाँचवें की मन्त्र, छठे की अरि, सातवें की मार्ग, आठवें की आयु, नवें की हृदय, दशवें की व्यापार, गेरहवें कीआगम, संज्ञा हैं।। ५५॥। बारहदें की व्यय मुह॒त्तचिन्तामणि १९० यात्रा में ग्रहों काशुभाशुभफल केन्द्रे कोण सौम्यखेटा: शभास्स्युर्याने पापास्व््यायषट्खेषु चन्द्र: । नेष्टो लग्नान्त्यारिरन्ध्रे शनिः खेस्ते शुक्रो लग्नेट नगान्त्यारिरन्ध्रे ॥ ५६॥
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