Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
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Hindi
अन्वयः--जन्मराशितन्त: अष्टमें अथवा स्वारिभात् रिपुभे तनुस्थिते, अथवा तदधिपा: यदा लग्नगाः स्यू: (तदा) नृपतेः गतं [गमनं ] हि मृतिप्रदं स्थात् ॥ ४५॥ जन्मराशि से या जन्मलग्न से आठवीं लग्न में अथवा शत्रु की जन्मराशि या जन्मलग्न से छठी लग्न में अथवा इन राशियों के स्वामी यदि लग्न में हों तो यांत्रा करनेवाले राजा की यात्रा मृत्यु देनेवाली होती है ।। ४५ ॥। अन्य शुभलग्न लग्ने चन्द्रे वापि वर्गोत्तमस्थे यात्रा प्रोक्ता वाड्िछतार्थेकदात्री । अम्भोराशौ वा तदंशे प्रशस्तं नौकायानं सर्वेसिद्धिप्रदापि ॥ ४६१४ अन्वयः--लग्ने अपि वा चन्द्रे, वर्गोत्तमस्थे वाडिछतार्थकदांत्री यात्रा प्रोक््ता। अम्भो राशौ वा तदंशे नौकायान प्रशस्तं सर्वेसिद्धिप्रदायि स्थात् ॥ ४६ ॥
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