Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 11 · · Verse 45
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

अन्वयः--अंथ मीनलग्ने उत वा तदंशके चलितस्य वत्म इह वक्र जायते । यदि जनिलग्नजन्मभपती शुभग्रहौ भवतः तदा तदुदये गम: शुभः (स्यात्‌) ॥ ४४॥ मीन लग्न अथवा मीन राशि के नवांश में यात्रा करनेवाला मार्ग भूलकर ठेढ़े मार्ग सेयात्रा करता है। जन्म लग्ग और जन्मराशि के स्वामी शुभ ग्रह होंऔर जिस लग्न में स्थित हों उसमें की हुई यात्रा शुभ होती है ॥ ४४ ॥। मुहत्तंचिन्तामणि १८६ अन्य अनिष्टट लग्न जन्मराशितनुतो5ष्टमे5थवा स्वारिभाच्च रिपुभे तनुस्थिते । लग्नगास्तदधिपा यदाथवा स्युगंतं हि नुपतेमृ तिप्रदम्‌ ॥ ४५॥

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