Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 11 · · Verse 44
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

अन्वयः--बुधै: यत्नतः सर्वथा कुम्भकुम्भांशको त्याज्यों, (यत: ) तत्न प्रयातु: नृपते: पदे-पदे अर्थनाश: (स्थात) ॥ ४३ ॥। पण्डितों कोचाहिए कि यत्नपूर्वक कुम्भ लग्न और कुम्भराशि का नवांश इन दोनों को यात्रा में त्याग दें, क्योंकि इनमें यात्रा करनेवाले राजा का धन अथवा प्रयोजन पद-पद में नष्ट होता है ॥ ४३ ॥। मीन और मीन के नवांश का फल तथा शुभलग्न अथ मीनलग्न उत वा तदंशके चलितस्य वक्रमिह वर्त्म जायते । जनिलग्नजन्मभपती शुभग्रहो भवतस्तदा तदुदये शुभो गमः ॥ ४४॥

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