Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 11 · · Verse 42
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

अनुकूल: तत्न संचलन्‌ रिपून्‌ जयेत, प्रतीन्दुजे (सम्मुखबुध करे तो राजा यदि वतक्रमार्ग तथा नीचस्थान में शुक्र के रहते यात्रा रहते भी यदि बुध शत्रओं केवशीभूत होता है। परन्तु शुक्र के वक्रादि ुओं को अवश्य अनुकल अर्थात्‌ पीछे स्थित हो तो यात्रा करनेवाला राजा शात्र ॥| ४१॥र नहीं होती अग केजय ओम हो तो स्पुखेस है. दलसम्म यदि बुध और यदि है,और लेताहै, हीजीत लेता शिपर्यन्त गोल और तुला से लेकर मीनरा #मेष से लेकर कन्याराशि पर्येन्त सूर्य केरहते उत्तर सूर्य के रहते दक्षिण गोल होता है । | उमा ८. यात्राप्रकरण १८५ कालबिशेष में शुक्ररोषाभाव तथा अस्तादिविचार यावच्चन्द्र: पूृषभात्कृत्तिकादे पादे शुको5न्धो न दुष्टो5पग्रदक्षे । मध्ये मार्ग भागंवास्तेषपि राजा तावत्तिष्ठेत्संमुखत्वेषपि तस्य ॥ ४२॥

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