अन्वयः--मेषादीनां (क्रमात्) भूषञ्चाडूदच ज्भदिग्वह्निसप्तवेदाष्टेशार्का: घाताख्यचन्द्र: (स्थात्) स राजसेवाविवादे यात्रायूद्धाओ च व्ज्य: अन्यत्न न वर्ज्य: ॥ २७ || मेष राशिवाले का पहिला, वृष राशिवाले का पाँचवाँ, मिथुन का नरवाँ, कक का दूसरा, सिंह का छठा, कन्या का दशव्वाँ, तुला का तीसरा, वृश्चिक का सातवाँ, धनु का चौथा, मकर का आठवाँ, कुम्भ का ग्य 7रहवाँ और मीन का बारहवाँ चन्द्रमा घातक होता है। यह घातचन्द्रमा योग राजा की सेवा, विवाद, यात्रा, युद्ध, इन कार्यों में वरजित है, अन्यत्र वर्जित नहीं हैं ।। २७ ।। घातचन्द्र चक्र मिशन कील कक... जुनून _॥लुइाअाम्णाणणअय उ॑आाणाा णएछएएछएणता दस च-८२ मे० |बु० |मि० |क० | सि० |क० |तु० |वु० |घ० |म० | कु० मीन | राशि घात४ ७ डर २ ३३:४६: कै: कह कक मे पक (८ |११. ९ | चन्द्रमा घातक नक्षत्रपाद आग्नेयत्वाष्ट्जलपपितन्र्यवासवरोद्रभे । मूलब्राह्मघाजपादक्षें पित््यमूलाजभ क्रमात् ॥ २८॥
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