!' ॥। ॥। |; ॥| ै | ै ह डे १७८ मुहत्तचिन्तामणि . रूपहयग्न्यग्निभ्राम दृचब्ध्यग्न्यब्धियुगाग्नयः । घातचन्द्रे धिष्ण्यपादा मेषाद्वर्जय मनीषिभिः ॥ २९४ अन्वयः--आगग्नेयत्वाष्टजलपपित्यवासव रौद्रभे मूलब्राह्मब्राजपादक्षे पिह्यमूलाजभे क्रमात् मेषादीनां (घातको ज्ञेय:) | मंषातघातचन्द्रे (क्रमात) रूपद्थग्न्यग्निभू रामद्यब्ध्यग्न्यब्धियुगाग्नय: धिष्ण्यपादा: मनीषिभिः वर्ज्या: || २८-२४ ।। मेष राशिवाले को कृत्तिका कापहिला चरण घातक है, वृष राशिवाले को चित्रा का दूसरा पाद घातक है, मिथुन राशिवाले को शतभिष का तीसरा पाद घातक है, कक॑ राशिवाले को मघा का तीसरा पाद घातक है, सिंह राशिवाले को धनिष्ठा का पहिला पाद घातक है, कन्या राशिवाले को आर्द्रा का तीसरा पाद घातक है, तुला राशिवाले को मूल का दूसरा पाद घातक है, वृश्चिक राशिवाले को रोहिणी का चौथा पाद घातक है, धनु राशिवाले को पूर्वाभाद्रषदर का तीसरा पाद घातक है, मकर राशिवाले को मघा का चौथा पाद घातक है, कुम्भ राशिवाले को मूल का दूसरा पाद घातक है और मीन राशिवाले को पूर्वाभाद्रपद का तीसरा पाद घातंक होता है । ये कृत्तिका आदि के घातपाद यात्रा आदि में पण्डितों कोवर्जित करना चाहिए ॥| २८-२९॥।
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