Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 11 · · Verse 15
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

अन्वयः--विश्वसंख्या: तमोभुक्ततारा: जीवपक्ष: शुभ: स्मृतः, च भोग्या: विश्वसंख्या: मृतः उक्तः, तदा क्रान्तभं कतंरीसंज्ञ उक्‍्तम, ततः (राहो:) अक्षेन्दुसंख्यं ग्रस्तनाम भवेत्‌ ॥। १४ ॥ राहु के भुकत तेरह नक्षत्र जीवपक्षसंज्ञक, और भोग्य तेरह नक्षत्र मृतपक्षसंज्ञक होते हैंऔर जिस नक्षत्र में राहु-स्थित हो वह नक्षत्र कतंरीसंज्ञक और उससे पन्द्रहवाँ नक्षत्र ग्रस्तसंज़््क होता है। इनमें यात्रा के लिए मुह॒त्तचिन्तामणि डे १७० तो उसके राहु होट जीवपक्ष शुभ होता है। उदाहरण--जसे हस्त नक्षत्र ब उलटे चलने के कारण चित्रा से लेकर पूर्वाभाद्रषर तक तेरह नक्षत्र भक्त होंगे उनकी जीवपक्ष संज्ञा होगी, और उत्तराफाल्गुनी से पूर्व रेवती तक तेरह नक्षत्र भोग्य होंगे उनकी मृतपक्ष संज्ञा होगी और हस्त कतंरीसंज्ञक तथा उत्तराभाद्रपद ग्रस्तसंज्ञक होगा । ये सब नीचे के चत्र में स्पष्ट ज्ञात होंगे ।। १४॥। जीवपक्षादि संज्ञाचऋ 2रे(/ “८242 «१ ऐ ७०७२२२०२२०२००४७०२२२२२०२०२२२७७२३२२०२२ 4हतजालाालाहाह? ब्श्न्न्त्श्ष्न्ल्ण्जफ्त्न्प्ल सस>सस२>२स२२८ ७55७७२ कफ आप पीके कक पक डक पक कप८६ कप | क्मः ब्य्रः रेः +7/27//2/7////77/7२2///////+ ः उ* | है #/+/7//////2/०7//////////// /#4. जीवपक्षादि का विशेष फल मातंण्डे मृतपक्षगे हिमकरबचेज्जीवपक्षे शुभा यात्रा. स्थादहिपरीतग क्षयकरी दो जीवपक्षे शुभा । ॥|| । ग्रस्तर्क्ष मृतपक्षतः शुभकर ग्रस्तात्तथा कत्तरी यकरो तो दौ तयोजोवगो ॥ १५॥

Have a question about this verse?

Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.

Ask about this verse