यायीन्दुः स्थितिमान्रविज | अन्वयः--मारंण्डे मृतपक्षगे चेत, हिमकरः: जीवपक्षे, तदा यात्रा शुभा स्यात्, विप- । || रीतगे क्षयकरी स्यात, द्वौ यदि जीवपक्षे तदा यात्रा शुभा, ग्रस्तक्ष मृतपक्षतः शुभकर, तथा ग्रस्तात कत्तरी [शुभकरा] तथा इन्दु: थायी, रविस्थितिमान् तौ ढोँ जीवगौ तयो [याग्रिस्थायिनों:] जयकरो ॥| १५॥। 4 यात्राश्रकरण ५१७१ सूर्य मृतपक्ष में और चन्द्रमा जीवपक्ष में हो तो यात्रा शुभ होती है, और इससे विपरीत अर्थात् चन्द्रमा मृतपक्ष में और सूर्य जीवपक्ष में हो तो यात्रा विनाश करनेवाली होती है । यदि सूर्य और चन्द्रमा, दोनों जीवपक्ष में हों तो यात्रा अति शुभ होती है, और यदि सूर्य-चन्द्रमा दोनों गम्रतपक्ष में हों तो यात्रा अति अशुभ होती है। मृतपक्ष से ग्रस्तसंज्ञक नक्षत्र कैसा शुभकर है जेसे मरे हुए से मरनेवाला रोगी अच्छा होता है, और ग्रस्तसंज्ञक नक्षत्र से कतंरीसंज्ञक कसा अच्छा है जंसे कि एक दिन में मरनेवाले से दो दिन में मरनेवाला अच्छा होता है । -अब राजाओं की यात्रा का विशेष फल कहते हैं । राजा दो प्रकार के होते हैं--एक यायी, दूसरा स्थायी । जो दूसरे राजा के ऊपर चढ़ाई करता है उसे यायी और जो अपने घर में है उसे स्थायी कहते हैं । चन्द्रमा यायी का स्वामी और सूर्य स्थायी का स्वामी है। यदि सूर्य-चन्द्रमा दोनों जीवपक्ष में हों तो यायी-स्थायी दोनों की विजय होती है और यदि चन्द्रमा जीवपक्ष में हो तो यायी राजा की विजय और सूर्य जीवपक्ष में होतो स्थायी राजा की विजय होती है, और यदि सूर्य-चन्द्रमा दोनों मृतपक्ष में हों तोदोनों की पराजय होती है ॥। १५॥। युद्धयात्रा केउपयोगी कुलाकुलसंज्ञक तिथि, वार, नक्षत्र स्वात्यन्तकाहिवसुपौष्णकरानुरा धादित्य श्रुवाणि विषमास्तिथयोउकुलाः स्युः। सुर्यन्दुमन्दगुरवशच कुलाकुलाज्ञो मूलाम्बुपेशविधिभं दहाषड्द्वधितिथ्य: ॥ १६॥
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.