Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
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अन्वयः--जयार्थी नृप: गमने आग्नेयमघानिलानां पूर्वाध, चित्राहियमोत्तराद्ध॑ हि त्यजेतूु, च उशनसः मतेन स्वातीं मघां समस्तां त्यजेल् ॥ १३ ॥ विजय चाहनेवाला राजा कृत्तिका, मघा और स्वाती का पूर्वाद्ध तथा चित्रा, इलेषा और भरणी का उत्तराद्ध यात्रा में त्याग दे । शुक्राचार्य के मत से सम्पूर्ण स्वाती और सम्पूर्ण मघा को यात्रा में त्याग दे ॥ १३॥ नक्षत्रों कीजीवपक्षादि संज्ञा तमोभुक्तताराः स्मृता विश्वसंख्या: शुभो जीवपक्षो मृतश्चापि भोग्याः । तदाक्रान्तभं॑ कतंरीसंज्ञमुक्त ततोएक्षेन्दुसंख्यं भवेदग्रस्तनाम ॥ १४ ॥
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