Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 11 · · Verse 13
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

अन्वयः--पूर्वा ग्निपिल्यान्तकता रकाणां भूपप्रकृत्युग्रतुरंगसा: नाड्य:, विशाखेन्द्रभुज ड्रमानांमनुसम्मिता: नाड्य: निषिद्धा: स्यु: ॥ १२ ॥ च स्वाती- तीनों पूर्वाओं के प्रथम सोलह दण्ड, कृत्तिका के इकक्‍्कीस दण्ड, मधा के ग्यारह दण्ड, भरणी के सात दण्ड, और स्वाती, विशाखा, ज्येष्ठा, दलेषा, इन नक्षत्रों केचौदह दण्ड यात्रा में निषिद्ध होते हैं ॥ १२ ॥ अन्यमत से त्याज्य घटी पूर्वाद्धमाग्नेयमघानिलानां त्यजेद्धि चित्राहियमोत्त राद्धम । नुपः समस्‍्तां गमने जयार्थों स्वातीं मधघां चोशनसो मतेन ॥ १३॥।

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