Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 11 · · Verse 11
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

अन्वयः-स्वजयजीवितार्थी बूधः पूर्वेदेशि शक्रभे न, तथा विधुसोरिवारे न पाशिदिशि ब्रजेत्‌ ॥ च अजपदभे, गुरो (दिने) यमदिशि न ब्रजेत्‌ । इनदैत्येज्ययो: धातृभे द 7 ब्रजेत्‌ तथा कुजबुधे अयेमक्षें सौम्यककुशि न ब्रजेंत्‌ ॥ १० ।। में धन, विजय और जीवन चाहनेवाला बुद्धिमान्‌ मनुष्य ज्येष्ठा नक्षत्र में तथा सोमवार और शरनेइ्चर के दिन पूर्व दिशा में, पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र रविवार तथा बृहस्पति के दिन दक्षिण दिशा में, रोहिणी नक्षत्र में तथा तथा मंगल, और शुक्र के दिन पश्चिम दिशा में और उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में बुध के दिन उत्तर दिशा में यात्रा न करे ।। १० ॥। कालविशेष में विशेष नक्षत्रों कानिषेध पूर्वाह्न श्रुवमिश्रभेन नृपतेर्यात्रा न मध्याह्वके तीक्ष्णाख्येरपराह्लके न लघुभरनों पूवरात्र तथा। मित्रार्येन च मध्यराजिसमये चोग्रेस्तथा नो चर राज्यन्ते हरिहस्तपुष्यशशिभिः स्यात्सवंकाले शुभा ॥ ११॥

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