Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 11 · · Verse 10
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

अन्बयः--षष्ठी (शुभा) न, च द्वांदशी न, अष्टमी न, सितादा तिथि: पूणिमा अमा न, रिकक्‍्ता न प्रशस्ता भवति। हयादित्यमंत्रेन्दुजीवान्त्यहस्तश्रवों बासबै: एव यात्रा प्रशस्ता स्थात्‌ ॥ & ॥। १६८ मुहत्तचिन्तामणि छंठि, द्वादशी, अष्टमी, शुक्लपक्ष की परीवा, पूर्णमासी, अमावास्या, चौथि, नवमी, चतु्देशी ये तिथियाँ यात्रा में शुभ नहीं हैं, अर्थात्‌ इन तिथियों में यात्रा न करे, इनको छोड़कर अन्य तिथियों में यात्रा करे; और अदिविनी, पुनर्वसु, अनुराधा, मृंगशिरा, पुष्य, रेवती, हस्त, श्रवण, धनिष्ठा, इन नक्षत्रों में की हुई यात्रा शुभ होती है ॥ ९ || वारशल ओर नक्षत्रशल न प्रवंदिशि शक्रभे न विधुसौरिवारे तथा न चाजपदभ ग्रौ यमदिश्ीनदत्येज्ययोः । न पाशिदिशि धातभे कुजबुधेष्यंमक्षें तथा न सौम्यककुभि ब्रजेत्स्वजयजीवितार्थों बुधः ॥ १० ॥

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